इस वर्ष से भी सभी को आस है
सब कह रहे खुशियों का पिटारा इसके पास है
यह नया वर्ष कुछ खास है,
बीते वर्ष की मधुर स्मृतियों और सीखों को भूल
सभी को बस कड़वी बातें याद हैं
पर नए वर्ष ने पहन रखा
एक निर्दोष बच्चे का लिबास है
इसलिए यह नया वर्ष कुछ खास है,
देशों के बीच जंग से होता रक्तपात
गरीबी, बेरोजगारी और बढ़ते जघन्य अपराध
क्या इन सब से मिलेगा निजात?
क्योंकि यह नया वर्ष है कुछ खास,
दिखावटी दुनिया में गायब होते जज़्बात
'लाइक्स' की होड़ में गुज़रते दिन और रात
बाहर की झूठी मुस्कान डालती प्रभाव
अंदर ही अंदर है बढ़ता तनाव,
लोगों से हर पल हैं घिरे लोग
फिर भी हैं भीड़ में अकेले लोग
नया साल गायब कर देगा सभी आडंबरों के प्रयास
क्योंकि यह नया साल है खास,
इन सभी अपेक्षाओं को सुनकर
नया साल डरा हुआ है भयंकर
है नहीं कुछ भी उसके बस में
हम सभी को ही मिलकर करने होंगे प्रयास
रखना होगा भीतर प्रेम और सद्भावना का अहसास
तभी बन पायेगा यह नव वर्ष खास।