चाहते हैं हम सब
दर्ज हो जाना
किसी अखबार में टॉपर के रूप में
किसी बड़े ओहदे के रूप में
किसी शिलान्यास के पत्थर पर
या किसी बड़ी इमारत की तख्ती पर।
इस चाहत में अकसर नज़रंदाज़ हो जाते हैं
हम से रोज़ मिलते मुस्कुराते चेहरे
हमारी चाहत पूरी होने की प्रार्थना करने वाले
हमें सुनने वाले, समझने वाले
हम से प्यार करने वाले
और हमारा खयाल करने वाले लोग।
क्या इन सब के प्यार को
अपने भीतर दर्ज कर लेना
दर्जनों खबरों, ओहदों, पत्थरों
और तख्तियों से ज़्यादा कीमती नहीं है?
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