Friday, October 18, 2024

अगर...

अगर पर्याप्त बारिश हो जाती
तो बाढ़ या सूखा न पड़ता,
अगर मिट जाती गरीबी-बेरोजगारी
तो चारों ओर कितनी खुशहाली होती,
अगर न छीना जाता बचपन
तो हर बेटी राजकुमारी होती,
अगर मिल जाता चांद पर पानी
तो वहां भी रहने की संभावना होती,

इसी तरह समय का पहिया एक और चक्कर लगा लेता है
और हम सब रह जाते हैं 
अपने-अपने 'अगर' के साथ,

अगर सब कुछ मिल जाता और हो जाता,
तो कुछ भी मिलने और होने को नहीं बचता।