Tuesday, September 24, 2024

रस्सा-कशी

एक बार फिर से
ठेल दी गई आगे
सरकारी भर्ती परीक्षा की तारीख
जैसे ठेल दी जाती है
एक बच्चे की गेंद
जब वो हठ करने लगता है,

एक बार फिर दिखा दिया हुक्मरानों ने
कि तुम्हारी हाथों की लकीरें 
नहीं हैं तुम्हारे हाथ में
वे हमारे हाथों के रिमोट से चलती हैं 
और हम तुम्हारे भाग्य-विधाता हैं,

हमारे हर मिजाज़ को स्वीकार करना
तुम्हारा धर्म है
और तुम्हारे सपनों के गुब्बारों से खेलना
हमारा पसंदीदा मनोरंजन
हमारे खिलाफ जाने का खयाल भी
डाल सकता है तुम्हें भारी मुश्किल में,

ये सब सुन के जब मैं थर्रा उठा
और हाथ कांपने लगे
तब उन्हें एक ठोस स्पर्श ने थामा
और वे अचानक सशक्त हो गए,

मन की सारी दुर्बलता और भय
एक ज्वलंत आक्रोश में बदल गए
और अपनी कलम को मजबूती से थाम के 
मैं एक हठी बच्चा बन गया।


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