एक लंबे अंतराल के बाद इस ब्लॉग पे कुछ पोस्ट हो रहा है। ऐसे में अंतराल होने का कारण और पोस्ट करने का उद्देश्य स्पष्ट कर देना उचित रहेगा। इस ब्लॉग की शुरुआत करने का उद्देश्य मात्र इतना था कि मैं अपने भावों को कविता के माध्यम से प्रकट कर लोगों तक पहुंचाना चाहता था। किंतु अब लगता है कि यह इतना आसान और मामूली उद्देश्य नहीं था जैसा उस समय लगा था। न केवल कुछ भाव लेकर उन्हें तुकबंदी के माध्यम से लोगों को समझा पाना महत्वाकांक्षी निर्णय था, बल्कि उन्हें कविता कहना बचकाना था।
कक्षा 11 में जब पहली कविता लिखी तो लोगों की सराहना और कोरोना के कहर से मिले अनिश्चित अवकाश को एक अवसर बनाने के प्रण के साथ इस ब्लॉग की शुरुआत की थी। अब जब वापस उस समय को देखता हूं तो ये लगता है कि यदि हवा में उमड़े भावों को तुकबंदी की तार में जकड़कर कुछ पंक्तियां लिखकर उन्हें 'कविता' की संज्ञा देने के बजाय यदि वास्तव में हिंदी साहित्य का अध्ययन किया होता तो एक अच्छा निर्णय होता। खैर, बीते हुए समय को अलग तरीके से जीने की कामना न केवल निरर्थक होती है, बल्कि कष्टकारी भी। इसलिए इस बात पर समय न व्यर्थ करते हुए आगे बढ़ जाना ठीक होगा।
आगे बढ़ने के क्रम में सबसे पहले इस ब्लॉग का नाम बदलने का निश्चय किया है। यह इसलिए नहीं कि देश में नाम बदलने का दौर चल रहा है, परंतु इसलिए क्योंकि मैं अपनी रचनाओं को कविता (Poetry) नहीं मानता। न मुझे इस स्तर पे साहित्य का उतना ज्ञान है और न मैं इतना सक्षम हूं की एक कविता की रचना कर सकूं। अगर मेरे द्वारा लिखी गई पंक्तियां कविता लगती हैं, या कोई प्रबुद्ध व्यक्ति उसे कविता की संज्ञा देता है, तो यह केवल एक संयोग है।
अब से इस ब्लॉग का नाम 'Hindi Poetries' से बदल कर 'मेरा आईना' होगा। मुझे यह लगता है कि जो लोग मेरी पंक्तियों की सराहना करते हैं वो मेरे स्वाभाविक कथन से प्रभावित होते हैं। इसलिए मैंने सोचा है कि इस ब्लॉग पर अपने भावों को स्वाभाविक रूप से व्यक्त्त करने का प्रयास करता रहूंगा।
अब मेरी यह इच्छा नहीं है कि मेरी लिखी गई पंक्तियां ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचे और लोग उन्हें सराहें। इस ब्लॉग के माध्यम से ढेर सारे लोगों तक नहीं, बल्कि स्वयं के मन की गहराइयों तक पहुंचने की इच्छा है। यह ब्लॉग मेरा हिंदी के प्रति लगाव और प्यार बनाए रखने तथा इस भाषा में सहज रूप से स्वयं को व्यक्त करने का एक प्रयास है। मैं चाहता हूं कि अपनी प्रेषित की गई पंक्तियों को भविष्य में पढ़ूं तो एक सकारात्मक बदलाव का क्रम सामने आए। अंत में, मेरी यह कामना है कि यदि भूले-भटके कोई एक व्यक्ति भी मेरे द्वारा लिखी पंक्तियां पढ़े तो उसका समय व्यर्थ न हो। कम से कम उसका मनोरंजन तो हो ही। इन्हीं अंतहीन कामनाओं के साथ 'नौकरी' शीर्षक के अंतर्गत लिखी मेरी नवीन पंक्तियां अगले पोस्ट में साझा कर रहा हूं।
धन्यवाद!
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